लगभग 35 साल तक चला एक आंदोलन - संघर्ष की एक दास्तान ' नामन्तर आंदोलन '
तारीख़ थी 27 जुलाई 1978 सदन के समर्थन के जरिये महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री शरद पवार जी ने मराठवाड़ा विश्वविद्यालय का नाम बाबासाहब के नाम पर रखने का एलान किया । महाराष्ट्र समेत देशभर में इस निर्णय पर खूब चर्चाऐं हुई व अनुसूचित जातियों / जनजातियों द्वारा इस निर्णय का स्वागत हुआ । लेकिन कुछ संगठनों व जाति विशेष के दबाव में एक राजनीतिक दल द्वारा इस निर्णय के विरोध में रैलियां व मार्च आदि निकाले , तो दूसरी तरफ अनुसूचित जाति / जनजातियों के संगठनों द्वारा तत्कालीन महाराष्ट्र सरकार द्वारा लिए गए निर्णय के समर्थन में व मराठवाड़ा विश्वविद्यालय का नाम बाबासाहब के नाम पर रखने के समर्थन में रैलिया व मार्च निकाले गए । 4 अगस्त 1978 को जोगेंद्र कवाड़े के नेतृत्व में दीक्षाभूमि नागपुर से लेकर जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय तक एक पैदल मार्च का आयोजन किया गया , मार्च के पश्चात वापिस लौट रही भीड़ पर कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा पत्थर फेंके गए , जिसने एक बड़ी हिंसा का रूप ले लिया जिसमे फायरिंग की घटनाएं भी सामने आई । देशभर में दलितो के बीच आक्रोश फैल गया । बड़ी संख्या में उत्तर भारत ( पंजाब...